वार्ड में तीन-तीन दिनों तक फैली रहती है गंदगी, मरीजों को नहीं देखने आते डॉक्टर - AKB NEWS

वार्ड में तीन-तीन दिनों तक फैली रहती है गंदगी, मरीजों को नहीं देखने आते डॉक्टर

राजधानी में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन 200 या इससे भी अधिक लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। पिछले महीने 5686 लोग संक्रमित हुए। मरीजों के बढ़ने से शहर के सभी अस्पताल भी फुल हो चुके हैं। इन सबके बीच अस्पतालों में अव्यवस्था मरीजों को जल्द ठीक करने के बजाय और बीमार बना रही है। गांधीनगर स्थित सीसीएल अस्पताल भी अव्यवस्था का शिकार है।

यहां सभी बेड पर कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। लेकिन कोविड वार्ड में फैली गंदगी ने मरीजों को परेशान कर दिया है। वार्ड में बाथरूम व टॉयलेट की सफाई नहीं होने के कारण मरीज इसका इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं। मजबूरी में बाथरूम व टॉयलेट जा तो रहे हैं लेकिन उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ठीक होने के बजाय और बीमार न पड़ जाएं। वार्ड में जहां-तहां गंदगी फैली रहती है। तीन-तीन दिन तक कचरा साफ नहीं होता।

मरीज परेशान... वार्ड सेनेटाइजेशन भी नहीं होता

सवाल... क्या पारस अस्पताल की तरह ही मरीजाें के हंगामा के बाद बदलेगी व्यवस्था

परेशानी... डरते हैं कि कहीं ठीक होने के बजाय कोई और बीमारी न हो जाए

शिकायत के बाद भी कोई सुननेवाला नहीं... स्थिति खराब होने के बाद हटाया जाता है कचरा

कोविड वार्ड मे गंदगी को लेकर मरीज कई बार शिकायत कर चुके हैं। लेकिन उनकी सुननेवाला कोई नहीं। जब काफी कचरा बढ़ जाता है और स्थिति खराब हो जाती है, तब कचरा हटाया जाता है। मरीजों की शिकायत है कि वार्ड को सेनेटाइज नहीं किया जाता। न ही रोज वार्ड में झाड़ू-पोछा होता है। बेडशीट भी हर दिन नहीं बदली जाती।

बुखार व ऑक्सीजन लेवल की जांच नर्स करती हैं

मरीजों ने बताया कि उन्हें देखने के लिए डॉक्टर नहीं आते। हर दिन नर्स आती हैं और बुखार व ऑक्सीजन लेवल की जांच करने के बाद दवा देकर चली जाती हैं। मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों की नियमित विजिट हो तो राहत मिलेगी। वहीं यहां खाने की गुणवत्ता तो ठीक है लेकिन रोटी कच्ची-पकी रहती है। इससे पेट खराब होने का डर रहता है।

प्रबंधन का आरोप... बाथरूम के बाद पानी नहीं डालते लोग

इधर अस्पताल प्रबंधन का कहना का की इन दिनों मरीजो की संख्या अस्पताल में ज्यादा है। सुबह हर दिन नियमित सफाई की व्यवस्था कराई जा रही है। लेकिन मरीज ही बाथरूम और टॉयलेट का इस्तेमाल करने के बाद सही तरीके से पानी नहीं डालते। इसकी वजह से गंदगी रहती है। पानी की बोतल, खाने का रैपर जहां-तहां मरीज फेंक देते हैं।





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