बारिश में भर जाता है नाला, इसलिए गांव से बाहर जाने के लिए श्रमदान कर बनाते हैं लकड़ी का पुल
आनंदपुर क्षेत्र में आज भी ऐसे कई गांव है जहां के लोग पक्की सड़कें व पुल पुलिया के लाभ से वंचित है। ऐसा ही एक गांव है बटमा जहां के ग्रामीण सदियों से लकड़ी के पुल एंव पथरीले भरे रास्तों पर चलने को मजबूर है। प्रखंड के झाड़बेड़ा पंचायत अंतर्गत बटमा में चबूतरा टोला, गंझू टोला, अंबाकोना टोला, मकोडकोचा टोला, भीतर टोला एंव बांस पहाड़ टोला में कुल 6 टोला है जिनमें करीब 300 की आबादी है। सभी टोले पहाड़ के किनारे बसे है। टोले के लोगों को प्रखंड मुख्यालय या बाजार तक पहुंचने के लिए भीतर टोला में एक खेत के नाले से होकर गुजरना पड़ता है।
नाला में सुगमता से पार होने के लिए ग्रामीण विगत 50 सालों से प्रतिवर्ष नाले पर श्रमदान कर लकड़ी का पुल का निर्माण करते आ रहे है। मालूम हो भीतर टोला में दो ऐसे स्थान है जहां पर आरसीसी पुल निर्माण की अतिआवश्यक है। बारिश के दिनों में नाला भर जाने की वजह से ग्रामीणों की परेशानी और भी बढ़ जाती है लोग प्रखंड से पूरी तरह से कट जाते है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार इस समस्या को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके है मगर उन्हें प्रतिनिधियों से आश्वासन के सिवाय कुछ भी नहीं मिला है।

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