रिम्स प्रबंधन ने जारी किया आदेश- लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर के वेतन से वसूला जाए 3 लाख
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर मरीज गुड़िया बाई के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोपी डॉ. अरशद जमाल के वेतन से तीन लाख तीन लाख रुपए मुआवजा राशि वसूलने का आदेश जारी कर दिया गया है। रिम्स निदेशक की ओर से बुधवार को आदेश जारी किया गया। साथ ही इसकी सूचना स्वास्थ्य सचिव को भी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने 21 अक्टूबर को ही मरीज गुड़िया के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोपी डॉक्टरों से मानवाधिकार आयोग के निर्देशानुसार तीन लाख रुपए वसूलने का आदेश दिया था। साथ ही चेतावनी भी दी थी कि आदेश का पालन नहीं किए जाने पर मानवाधिकार आयोग में व्यक्तिगत पेशी के लिए उपस्थित होने के आदेश के लिए रिम्स निदेशक जिम्मेवार होंगे।
बायीं किडनी में थी पथरी, डॉक्टर ने दांयीं ओर लगा दिया चीरा
करीब दो साल पहले कांके के बोड़ेया निवासी गुड़िया बायीं किडनी में पथरी की शिकायत लेकर रिम्स के यूरोलॉजी विभाग में भर्ती हुई थी। विभागाध्यक्ष डॉ. अरशद जमाल की देखरेख में उसका इलाज शुरू हुआ। विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अफसर आलम ने उसका ऑपरेशन भी किया, लेकिन बाद में पता चला कि डॉक्टर ने बायीं की जगह पेट की दांयीं ओर चीरा लगा दिया है। डॉक्टरों ने लापरवाही छुपाने के लिए उसे पहले बरियातू स्थित एक निजी अस्पताल भेजा। हालांकि वहां इलाज नहीं होने के बाद गुड़िया को पुन: रिम्स लाने को कहा गया।
इधर, डॉ. विनय प्रताप को किया गया आरोप मुक्त
वहीं एक अन्य मामले में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विनय प्रताप और डॉ. अरशद जमाल को बरी कर दिया गया है। इससे संबंधित आदेश भी जारी किया गया है। आरोप था कि कोविड काल में इन दोनों डॉक्टरों की ओर से ड्यूटी नहीं की गई थी। रिम्स जीबी के निर्देश पर इन दोनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण लिया गया और इन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया।

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