बिरसा हरित ग्राम योजना में होगा गैर मजरुआ जमीन का भी इस्तेमाल
मनरेगा एक बहुआयामी योजना है, जिसके अंतर्गत रोजगार, आवास, पेयजल, महिला सशक्तिकरण, सिंचाई, सड़क, पौधरोपण इत्यादि से संबंधित कई योजनाओं का संचालन हो रहा है। मनरेगा कई योजनाओं का समेकित स्वरूप है। इस योजना से ग्रामीण इलाके की एक बड़ी आबादी को फायदा पहुंचाया जा सकता है। ऐसे में मनरेगा से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर और योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजित करने पर ज्यादा फोकस हो, ताकि ग्रामीण इलाके में ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके।
मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने की दिशा में पहल हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरी दर अभी भी न्यूनतम मजदूरी दर से कम है। मनरेगा श्रमिकों को प्रति दिन 194 रुपए मजदूरी मिलती है, जबकि राज्य में न्यूनतम मजदूरी दर 283 रुपए है। ऐसे में इस अंतर को कम करने के लिए मनरेगा मजदूरी दर मे बढ़ोत्तरी जरूरी है।
इस बाबत केंद्र सरकार से सहमति लेने की दिशा में विभाग कदम उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत एक लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित करें। इसके लिए गैर मजरुआ जमीन का भी इस्तेमाल किया जाए। पहले चरण में जिलास्तर पर नर्सरी बनाई जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों मे बिजली-पेयजल की सुविधा होगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित घरों में बिजली कनेक्शन देने के लिए ऊर्जा विभाग और पेयजल के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से समन्वय बनाया जाए। हर घर में ये दोनों सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में सभी को आवास सुनिश्चित कराना प्राथमिकता है. ऐसे में अभी तक जिनका आवास नहीं है, उसकी जानकारी लेने के लिए सर्वे कराया जाए और फिर उन्हें आवास आवंटित करने की दिशा में कार्रवाई की जाए।
दाल भात केंद्रों पर प्लास्टिक के उपयोग को खत्म कर दोना पत्तल के इस्तेमाल को बढ़ावा दें
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब तक सरकार द्वारा दिए जा रहे अनाज को उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। सीएम बुधवार को खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार दाल-भात केंद्रों को सुदृढ करने की दिशा में कार्य कर रही है। यहां प्लास्टिक की जगह पत्तल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। हेमंत ने कहा कि जनवितरण प्रणाली द्वारा लाभुकों को चीनी उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ यदि गुड़ का भी वितरण किया जाए, तो यह सेहत के लिए भी लाभदायक है साथ ही हमारे किसानों को गन्ना उत्पादन की दिशा में भी प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

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