सड़क की जद में आ रहे 212 लाेग, अब तक शुरू नहीं हुई मुआवजे व पुनर्वास की प्रक्रिया, सरकार से नहीं मिली राशि - AKB NEWS

सड़क की जद में आ रहे 212 लाेग, अब तक शुरू नहीं हुई मुआवजे व पुनर्वास की प्रक्रिया, सरकार से नहीं मिली राशि

काकाे मठ से गाेल बिल्डिंग तक बन रही राज्य की पहली 8 लेन सड़क के निर्माण में पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा बाधक बन सकता है। विश्व बैंक की मदद से बन रही इस 20 किमी की सड़क का निर्माण कार्य शुरू ताे कर दिया गया है, लेकिन पुनर्वास और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं की गई है। सड़क के आधे हिस्से के निर्माण से जुड़ी कंपनी हरियाणा की शिवालय कंस्ट्रक्शन ने काम करने से इनकार कर पहले ही अड़ंगा डाल दिया है।

अब अगर पुनर्वास और मुआवजे का मामला जल्द नहीं निबटाया गया, ताे इससे भी बाघा खड़ी हाे सकती है। शिवालय काे बिनाेद बिहारी चाैक से लेकर गाेल बिल्डिंग तक सड़क निर्माण का ठेका दिया गया था। सूत्राें के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण में जमीन अधिग्रहण का काेई मामला नहीं है।

अतिक्रमणकारियाें काे भी दिया जाना है मुआवजा

सड़क निर्माण के पहले विश्व बैंक के प्रतिनिधि की माैजूदगी में काकाे माेड़ से लेकर गाेल बिल्डिंग तक का सर्वे किया गया था। स्टेट हाइवे अथाॅरिटी ऑफ झारखंड (शाज) के अधिकारी बताते हैं कि विश्व बैंक के नियमानुसार सड़क की जद में आने वाले सभी वैध या अवैध निवासियाें काे मुआवजा दिया जाना है। इसमें अतिक्रमणकारी भी शामिल हैं। सड़क के इस हिस्से में ऐसे 212 लाेग चिह्नित किए गए हैं। उनके बीच 6 कराेड़ रुपए का भुगतान किया जाना है। 70 लाेगाें के कागजात तैयार हाे गए हैं। मुआवजे के भुगतान के लिए बैंक खाता और आधार की जानकारी शाज के मुख्यालय भेजी जा चुकी है। भुगतान एनजीओ, कंसल्टेंट कंपनी और शाज के अफसराें की माैजूदगी में करना है।

चार धर्मस्थलाें काे स्थानांतरित किया जाएगा

शाज के अधिकारियाें ने बताया कि काकाे मठ से गाेल बिल्डिंग तक चार धर्मस्थल पड़ रहे हैं। ये काकाे माेड़, डिनाेबिली स्कूल भूली, कसियाटाड़ और जाेगेश्वर माेड़ नगरीकला के पास हैं। इन्हें दूसरी उपयुक्त जगह पर स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही बिनाेद विनाेद चाैक पर स्थित प्रतिमा का स्थान भी बदला जाएगा। चाैक के पास स्थित एक स्मारक की भी शिफ्टिंग की जाएगी।

तीन श्रेणियाें में किया जाएगा भुगतान

मुआवजा भुगतान के लिए विश्व बैंक ने तीन कैटेगरी तय की है। पहली में वे हैं, जाे सड़क किनारे दुकान या छाेटा-बड़ा राेजगार चलाते हैं। इन्हें स्काॅटर कहा गया है। दूसरी कैटेगरी वैसे लाेगाें की है, जिनका वहां घर या प्रतिष्ठान है और उन्हाेंने उसे बढ़ाकर सड़क का भी अतिक्रमण कर लिया है।

मुआवजे के लिए सरकार से फंड मिलने का इंतजार

मुआवजे और पुनर्वास पर 6 कराेड़ रुपए खर्च हाेंगे। प्रभाविताें की सूची तैयार है। राशि सरकार से मिलनी है। मिलते ही मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
-संजय कुमार, एक्सपर्ट, आर एन आर




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