बकाया काे लेकर डीवीसी ने शहर में शेड्यूल माेड पर 3 घंटे काटी बिजली, जेबीवीएनएल के 6 फीडराें में 40 एमवीए कम सप्लाई की बिजली - AKB NEWS

बकाया काे लेकर डीवीसी ने शहर में शेड्यूल माेड पर 3 घंटे काटी बिजली, जेबीवीएनएल के 6 फीडराें में 40 एमवीए कम सप्लाई की बिजली

डीवीसी ने अपना बकाया भुगतान काे लेकर शेड्यूल माेड पर बिजली कटाैती शुरू कर दी है। साेमवार काे डीवीसी ने गणेशपुर सर्किट वन और टू फीडर में अलग-अलग समय में 3 घंटे बिजली सप्लाई बंद रखी। हालांकि, शेडिंग का समय सुबह 9 बजे से लेकर दाेपहर के 12:30 बजे के बीच रहा। सुबह 9 बजे डीवीसी ने गणेशपुर सर्किट टू फीडर की पावर सप्लाई बंद कर दी। दिन के 10:30 बजे पावर सप्लाई शुरू की गई।

 इसी तरह दिन के 11 बजे डीवीसी ने गणेशपुर सर्किट वन फीडर काे हाेने वाली बिजली सप्लाई बंद कर दी। दाेपहर 12:30 बजे डीवीसी की ओर से फीडर की बिजली सप्लाई शुरू की गई। जेबीवीएनएल के धनबाद सर्किल में 6 फीडर है।

इनमें गणेशपुर वन, टू, गाेधर वन, टू, पाथरडीह व मुकुंदा शामिल है। इन 6 फीडरों में डीवीसी की ओर से 120 मेगावाट बिजली सप्लाई की जाती है। तय घाेषणा के अनुसार इस सप्ताह डीवीसी 30 प्रतिशत शेड्यूल माेड पर बिजली आपूर्ति करेगी। इस दाैरान भुगतान नहीं हाेने पर कटाैती का प्रतिशत 10 प्रतिशत बढ़ाने की चेतावनी डीवीसी ने दी है। डीवीसी ने कुल बकाया 4949 कराेड़ रुपए बताया है। डीवीसी का कहना है कि सितंबर महीने से जेबीवीएनएल की ओर से बकाया का भुगतान नहीं किया गया।

कांड्रा से मिली बिजली, कटाैती का नहीं दिखा असर

डीवीसी द्वारा की जा रही कटाैती का धनबाद शहर में असर नहीं दिखा। धनबाद शहर में सामान्य दिन की तरह बिजली आपूर्ति जारी रही। गाेविंदपुर के कांड्रा ग्रिड से धनबाद काे मिल रही 50 मेगावाट बिजली से शहर में निर्बाध आपूर्ति की गई।

डीवीसी की बिजली कटौती पर जेबीवीएनएल नाराज

झारखंड बिजली वितरण निगम ने डीवीसी के बिजली कटौती रेगुलेशन पर नाराजगी जाहिर किया है। निगम के कार्यकारी निदेशक केके वर्मा ने कहा कि जेबीवीएनएल डीवीसी का एक उपभोक्ता है। आउटस्टैडिंग बकाया का पहला किश्त 1400 करोड़ केंद्र ने झारखंड के हिस्से के पैसे काटकर दे दिया है। इसके बाद काटी हुई राशि को समायोजित करके डीवीसी ने अभी तक रिफलेक्श्न जारी नहीं किया है।

 अब 2600 करोड़ रुपए ही शेष बचा है। करंट बिल 150 करोड़ रुपए ही है, क्योंकि पहले जो यह बिल 225 करोड़ के आसपास होता था, अब यह जेबीवीएनएल का अपना ट्रांसमिशन नेटवर्क बन जाने के कारण घट कर 150 करोड़ रुपए में पहुंच गया है।




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