नौकरी नहीं मिली तो बंजर भूमि पर सरसों उगाया - AKB NEWS

नौकरी नहीं मिली तो बंजर भूमि पर सरसों उगाया

जमुआ प्रखंड अंतर्गत कुरहोबिन्दो पंचायत के रैनियाटांड़ निवासी भौतिक विज्ञान प्रतिष्ठा छात्र नौकरी पाने में सफल नहीं हुआ तो उन्होंने कृषि कार्य को पेशा बनाया। 10 एकड़ बंजर भूमि मेंं सरसों की खेती की फिलहाल मेहनत से फसल लहलहा रही है। शिक्षित किसान अजय प्रसाद वर्मा (30)आसपास के गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। युवा किसान अजय प्रसाद वर्मा ने बताया कि 2017 में भौतिकी विज्ञान से स्नातक की पढ़ाई पूरी की लेकिन उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिली।

वो थक हार कर अब पूरा समय कृषि कार्य मेंं लगाना उचित समझा। बंजर पड़ी जमीन मेंं आलू, टमाटर, फूलगोभी, पतागोभी, गेहूं, सरसों आदि की खेती करने लगा। इस खेती से वह प्रत्येक वर्ष चार-पांच लाख रुपए कमा रहा है। बताया कि बचपन से ही प्रकृति के नजदीक रहने के शौकीन अजय ने ऊंच शिक्षा हासिल कर आखिरकार कृषि को अपनाया इसमें उन्हें अविश्वसनीय सफलता भी मिलती दिख रही है।

लगभग दस एकड़ पथरीली बंजर भूमि को बना दिया खेती के लायक

अजय प्रसाद वर्मा द्वारा खेती को वैज्ञानिक व पारंपारिक तरीके से किया जाता है। उन्होंने लगभग 10 एकड़ पथरीली बंजर भूमि में अत्याधुनिक तरीके से सरसों को लगाया है। इससे पहले किसी भी फसल की ऊपज ठीक से नहीं होती थी। अन्य किसान जहां सामान्य तौर से इसकी खेती करते हैं वहीं उन्होंने क्यारियां बना कर उसमें सरसों को लगाया है। बताया इससे पौधों की वृद्धि व विकास के लिए पर्याप्त स्थान मिलता है।

उन्हें पोषक तत्वों, पानी व सूर्य के प्रकाश के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा बहुत कम करनी पड़ती है जिससे उसका समुचित विकास होता है। पौधे बड़े व मोटे होते हैं तथा अधिक ऊपज देते हैं। क्यारियों से पटवन व उर्वरक डालने में भी सहूलियत होती है और कम पानी से पौधों की सिंचाई हो जाती है।

सरसों के अलावा उन्होंने वर्तमान में कई एकड़ में गेहूं, आलू, पत्तागोभी, फूलगोभी, बैंगन, टमाटर आदि विभिन्न सब्जियों को भी लगाया है। सिंचाई कुआं व डीजल पंप से करते हैं। उनके क्रियाकलापों से युवा किसानों को सीखने की जरूरत है।



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