सांसाें के लुटेरे:हजारीबाग मेडिकल काॅलेज से ऑक्सीजन के 183 सिलेंडर, 60 रेगुलेटर व रेमडेसिविर चोरी; बच सकती थी 100 से अधिक की जान : रांची/हजारीबाग - AKB NEWS

सांसाें के लुटेरे:हजारीबाग मेडिकल काॅलेज से ऑक्सीजन के 183 सिलेंडर, 60 रेगुलेटर व रेमडेसिविर चोरी; बच सकती थी 100 से अधिक की जान : रांची/हजारीबाग


         

ऑक्सीजन सिलेंडर
  • * दो वार्ड ब्वॉय सप्लायर को ही बेचनेे चले गए सिलेंडर, उन्होंने पकड़वाया
  • * आउटसोर्सिंग सेवा के सुपरवाइजरों से भी पुलिस ने की पूछताछ
  • * मेडिकल कॉलेज अधिकारियों की नाक के नीचे हाेता रहा ऑक्सीजन व जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी का खेल
  • काेराेना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के बिना मरीज मरते रहे और सांसाें के लुटेरे हजारीबाग मेडिकल काॅलेज से 183 सिलेंडर और 60 रेगुलेटर चुरा ले गए। काॅलेज प्रबंधन काे इसकी भनक तक नहीं लगी। चाेरी का पता मंगलवार काे चला, जब आउटसाेर्सिंग कंपनी के वार्ड ब्वाॅय सुरेंद्र कुमार यादव और माे. आसिफ सिलेंडर बेचने ऑक्सीजन सप्लायर के पास पहुंचे। उन्हाेंने सप्लायर काे छोटा सिलेंडर 4,000 रुपए और बड़ा सिलेंडर 18,000 रुपए में देने की बात कही। सप्लायर आरआर ट्रेडर्स लोहसिंहना के मोहम्मद अफाक अली रसीद ने सिलेंडर लाने काे कहा।

    जैसे ही सुरेंद्र ऑटाे से सिलेंडर लेकर पहुंचा, सप्लायर ने पहचान लिया कि यह मेडिकल काॅलेज हाॅस्पिटल का है। उसने काॅलेज प्रबंधन काे सूचना दी। इसके बाद डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डाॅ. एके सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अस्पताल के दाेनाें वार्ड ब्वाॅय गदाेखर के सुरेंद्र यादव और नूरा के माे. आसिफ काे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आउटसाेर्सिंग कंपनी एमजे साेलंकी के दाे सुपरवाइजर काे भी हिरासत में लिया था। लेकिन दाेनाें काे पूछताछ के बाद पीआर बाॅन्ड पर छाेड़ दिया गया। अप्रैल से मई के बीच में जब चाेरी की वारदात हुई, उस दाैरान यहां काेराेना के 158 और काेराेना संदिग्ध 155 यानी कुल 313 की माैत हुई। इनमें से कई जानें ऑक्सीजन के अभाव में गईं। जितने सिलेंडर चोरी हुए, उतने ऑक्सीजन से 100 से अधिक मरीजों की जान बच सकती थी।

    वार्ड ब्वाॅय- मरीजाें काे और बाजार में ऊंचे दाम पर बेच देते थे सिलेंडर

    इस पूरे मामले में वार्ड ब्वाॅय की संलिप्तता सबसे ज्यादा थी। जब ऑक्सीजन की किल्लत चल रही थी ताे वार्ड ब्वाॅय ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल से बाहर ले जाते और मरीज काे बेच देते। इसके लिए मनमाना कीमत वसूलते। बाद में मरीज के परिजन इसे अपना बताकर साथ ले जाते। सिलेंडर के साथ ही वे लाेग रेगुलेटर भी महंगे दाम पर बेच रहे थे। यह सारा खेल 10 अप्रैल से ही चल रहा था। लेकिन काेई इसे देखने वाला नहीं था। अब सिलेंडर बेचते समय पूरे मामले की पाेल खुली।

    स्टाफ- उन्हें पता था कि सिलेंडर बेचे जा रहे हैं, पर सभी माैन थे

    अस्पताल के स्टाफ काे भी इस पूरे मामले की जानकारी थी। सुपरवाइजर, स्टाेरकीपर, गेटकीपर हाे या मैनेजर, कोई भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता। सबको पता था कि ऑक्सीजन सिलेंडर और रेगुलेटर अस्पताल से चुराकर बेचे जा रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम पड़ताल करने पहुंची ताे वहां इचाक के एक मरीज का परिजन रेगुलेटर के लिए परेशान था। अस्पताल में रहने के बावजूद नहीं मिल रहा था। एक दलाल ने 4200 रुपए में एक रेगुलेटर दिया। एक नर्स ने उससे पूछा कि कहां से लिया, ताे उसने बताया कि एक दलाल से लिया है। इसका वीडियाे भास्कर के पास उपलब्ध है।

    अधिकारी: जानते थे चोरी हो रही है, फिर भी ठोस कदम नहीं उठाए

    मेडिकल काॅलेज की देखरेख की जिम्मेदारी सुपरिंटेंडेंट डाॅ. बीके सिंह की है। उन्हाेंने कहा-अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर में रेगुलेटर गायब हाेने की सूचना मिल रही थी। इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन काे दी थी। इसके बाद पुलिस ने वहां जवानाें काे तैनात कर दिया था। हालांकि पुलिस ने चाेरी की सूचना मिलने से इनकार कर दिया है।

  •  बड़ा सवाल है कि चोरी जैसी घटना पर थाने में लिखित शिकायत की जाती है। मौखिक शिकायत नहीं। जब अस्पताल में इतनी बड़ी चोरी हो रही थी, अस्पताल प्रबंधन को जानकारी थी तो इसकी लिखित शिकायत क्यों नहीं की गई। पुलिस पर दबाव क्यों नहीं बनाया गया।

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