वैक्सीन डिप्लोमेसी:बाइडेन ने भरा दम- चीन, रूस से 5 गुना ज्यादा टीके बांटेंगे, अब दानवीर बनने की होड़, बाइडेन का ज्यादा का वादा लेखक: शेरिल गे स्टोलबर्ग और डेनियल ई. स्लॉटनिक
महामारी के दौर में सबसे ज्यादा चर्चा वैक्सीन की है। ऐसी ही है- वैक्सीन डिप्लोमेसी, जिसमें जरूरतमंद देशों को टीके दिए जा रहे हैं। लेकिन इसमें रूस और चीन के दबदबे ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति को चिंता में डाल दिया है। उन्हें डर है कि हर मामले में दुनिया का नेतृत्व करने वाला अमेरिका इसमें पिछड़ न जाए। शायद इसीलिए उन्होंने वैक्सीन डोनेशन प्लान की घोषणा की है।
बाइडेन ने जरूरतमंद देशों को 8 करोड़ डोज दान देने का वादा किया है। उन्होंने कहा, ‘यह किसी भी देश के मुकाबले अधिक हैं। यहां तक कि रूस और चीन की तुलना में भी 5 गुना ज्यादा हैं।’ साथ ही कहा कि इसमें भी दुनिया का नेतृत्व हम ही करेंगे।
इसमें 2 करोड़ डोज फाइजर, मॉडेर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के होंगे, जबकि बाकी 6 करोड़ डोज एस्ट्राजेनेका के। ऐसा पहली बार होगा जब अमेरिका अपने इस्तेमाल की वैक्सीन दूसरे देशों को देगा।
टीकों का इस्तेमाल दूसरों का समर्थन लेने के लिए नहीं: बाइडेन
बाइडेन ने कहा कि हम टीके इसलिए नहीं दे रहे हैं कि कोई देश हमारा समर्थन करें। वैक्सीन डोनेशन प्लान की घोषणा करते वक्त राष्ट्रपति बाइडेन रूस और चीन के दबदबे से चिंतित दिखे।
इस पर बाइडेन ने कहा, ‘हर जगह चीन और रूस के वैक्सीन के जरिए विश्व को प्रभावित करने की चर्चा है। हम अपने मूल्यों के हिसाब से दुनिया का नेतृत्व करना चाहते हैं, जैसा दूसरे विश्व युद्ध में किया था। ऐसे ही वैक्सीन के मामले में भी हम नेतृत्व करेंगे।
चीन की वैक्सीन को जोखिम भरा बताने की बात दोहराई
बाइडेन ने चीन और रूस से 5 गुना ज्यादा वैक्सीन दान करने का ऐलान तो किया ही। उस बात को भी दोहराया जिसमें विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन और कुछ अधिकारियों ने चीन की वैक्सीन पर सवाल उठाए थे।
इसमें चीनी वैक्सीन को जोखिम भरा बताया गया था। चीन सिनोफार्म और सिनोवैक के 1.74 करोड़ डोज दान कर चुका है। दोनों कंपनियों ने 65 करोड़ डोज बेचे भी हंै। वहीं रूस भी स्पुतनिक-V टीके के 2 करोड़ डोज दान कर चुका है।
- * अमेरिका पहली बार उसके इस्तेमाल किए जा रहे टीके दूसरों को देगा।
- * फाइजर, मॉडेर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन के 2 करोड़ टीके दान करेगा।
- * चीन और रूस करीब 2-2 करोड़ वैक्सीन गरीब देशों को दे चुके हैं।


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