बच्चों को बचाना होगा:झारखंड में तीसरी लहर में तीसरे दिन ही कम पड़ सकते हैं बच्चों के बेड; क्याेंकि 2000 बच्चों के रोज संक्रमित होने का खतरा : रांची
रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में 14 दिन का कोविड पीड़ित मासूम।
- * 150 सीवियर अस्पताल में हो सकते हैं भर्ती, हमारे पास सिर्फ 436 बेड, चाहिए 1500
- * दूसरी लहर के 65 दिनों में राज्य में 14 साल तक के 7698 बच्चे संक्रमित मिले, यानी हर दिन 119 पॉजिटिव
भास्कर एक्सपर्ट-डॉ श्याम सिडाना, इलेक्टेड प्रेसिडेंट इंडियन पीडियाट्रिक एसो., रांची
केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की चेतावनी के बाद यह बात जोर पकड़ने लगी है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए सबसे खतरनाक होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार तीसरी लहर दूसरी की ही तरह होगी, लेकिन इसमें 50 प्रतिशत मरीज बच्चे हो सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की इसी चेतावनी के आधार पर तीसरी लहर में झारखंड में हर दिन जितने केस मिलेंगे उनमें 50% कोरोना पॉजिटिव शून्य से 14 साल के बीच के बच्चे हो सकते हैं। इनमें 10% बच्चे अस्पतालों में भर्ती कराए जा सकते हैं।
इस लिहाज से हर दिन राज्य में करीब 2000 बच्चों के पॉजिटिव मिलने का खतरा है। क्योंकि आज औसतन 4000-4500 पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं। इनमें 150-200 बच्चाें को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ सकता है। यदि यह अनुमान सही हुआ तो तीसरी लहर शुरू होने के तीसरे दिन ही बच्चों के लिए नो बेड की स्थिति बन सकती है। क्योंकि, अभी राज्य के सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए सिर्फ 436 बेड ही हैं। इनमें सभी जिलों के सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध बच्चों के वार्ड, एनआईसीयू, एसएनसीयू बेड शामिल हैं।
हमें ये समझना होगा कि बच्चों में कोविड के अलग लक्षण होते हैं। इनमें अन्य बीमारियों से अलग कोविड के लक्षणों की पहचान करना आवश्यक है। सुस्ती, खाना-पीना नहीं करना जैसे सामान्य लक्षणों से लेकर शरीर में चकते, ओठ, जीभ और आंखों में लालपन, डायरिया, लो ब्लड प्रेशर आदि जैसे गंभीर लक्षण भी दिख सकते हैं। इसलिए लक्षणों के अनुसार इलाज जरूरी होगा। इसके लिए ट्रेनिंग जरूरी है। ट्रेनिंग से बच्चों को मॉडरेट से सीवियर होने से रोका जा सकता है और अस्पतालों के पीआईसीयू में रेफर किया जा सकता है। तीसरी लहर में बच्चों को भर्ती करने के लिए राज्य के सरकारी अस्पतालों में कुल 1500 बेड होने चाहिए।
फिलहाल 436 बेड हैं, तो और 1064 बेड की जरूरत पड़ेगी। इसका आधार 10 दिनों की रिकवरी है। क्योंकि क्रिटिकल केयर के 10 दिनों में बच्चे रिकवर होकर घर लौटेंगे। वहीं डॉक्टरों की भी और जरूरत होगी। फिलहाल सरकारी अस्पतालों में 104 चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं। अनुमान है कि तीसरी लहर में झारखंड में 180 चाइल्ड स्पेशलिस्ट की जरूरत होगी। क्योंकि रोज 2000 पॉजिटिवि बच्चे मिलेंगे और यह दूसरी लहर की तरह ही भयावह होगा। ऐसी नौबत न आए इसके लिए कोविडल प्रोटोकॉल का पालन सबसे जरूरी है।
- अभी उपलब्ध- 436 बेड, 104 डॉक्टर
- और जरूरत- 1500 बेड, 180 डॉक्टर
- राज्य के 24 जिलों के सदर अस्पतालों में किसी में भी पीडियाट्रिक आईसीयू नहीं है। 18 जिले में सदर अस्पताल में बच्चों के लिए अलग से सामान्य वार्ड भी नहीं हैं। 18 जिलों में एनआईसीयू भी नहीं है।
झारखंड में 97 लाख बच्चे और 104 चाइल्ड स्पेशलिस्ट यानी हर 94 हजार बच्चों पर 1 डॉक्टर
राज्य में शून्य से 14 साल तक के लगभग 9771300 लाख बच्चों के लिए सिर्फ 104 चाइल्ड स्पेशलिस्ट ही सभी सदर अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में हैं। यानी 94 हजार बच्चों पर एक, जबकि डब्ल्यूएचओं के अनुसार प्रति एक हजार बच्चों पर एक होना चाहिए।
सुधार जरूरी...सरकार ने कई कदम उठाए, पर अभी भी बच्चों पर फोकस नहीं
तीसरी लहर के लिए राज्य सरकार के 5 बड़े कदम- * 1100 ऑक्सीजन सिलेंडर और 600 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीद रही
- * 15 पीसीए ऑक्सीजन प्लांट लगाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया
- * राज्य में नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए जिनोम सिक्वेंसिंग मशीन केंद्र सरकार से मांगी गई
- * आरटीपीसीआर वर्क स्टेशन, मोबाइल आरटीपीसीआर लैब की मांग केंद्र सरकार से की गई है
- * 1500 वेंटिलेटर केंद्र से मांगे
अन्य राज्यों ने बाल कोविड केंद्र, टास्क फोर्स बना ली
- * महाराष्ट्र में बाल कोविड केंद्र बना
- * कई राज्यों में बाल चिकित्सा टास्क फोर्स बनाई जा रही है।
- * सरकारी अस्पतालों में बच्चों के बेड बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं
- * बच्चों के अलग वेंटिलेटर और अन्य उपकरणों की व्यवस्था हो रही
- * बाल चिकित्सकों की कमी दूर करने को पदाधिकारियों की ट्रेनिंग
- * हर जिले में पीडियाट्रिक आईसीयू बनाई जा रही
बाल चिकित्सा की योजनाएं अभी भी फाइलों में घूम रही
राज्य के सभी जिला अस्पतालों में पीडियाट्रिक आईसीयू और एनआईसीयू बनाने की योजना बनाई गई, लेकिन अभी तक यह फाइलों में ही है। अभी सिर्फ पांच जिला अस्पतालों- चाईबासा गुमला, जमशेदपुर, रामगढ़ और सरायकेला में ही न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) बनाई गई है।


Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें