जी-7 बैठक:चीन काे घेरने के लिए जी-7 देशाें ने ‘बी-3 डब्ल्यू’ काे मंजूरी दी, गरीब और विकासशील देशाें में इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतें पूरी करेंगे
दुनिया के विकसित जी-7 देशाें ने चीन को घेरने की रणनीतिक याेजना काे हरी झंडी दी है। ब्रिटेन के काॅर्नवाल में जी-7 के शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार काे इस योजना को लॉन्च किया गया। इसे ‘बी-3 डब्ल्यू’ (बिल्ड, बैक, बेटर वर्ल्ड) प्राेजेक्ट कहा गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जाे बाइडेन सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में इसकी शुरुआत हुई। इसके जरिए गरीब और विकासशील देशाें में इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरताें काे पूरा किया जाएगा। इसे चीन के बेल्ट एंड राेड इनीशिएटिव प्रोजेक्ट का जवाब माना जा रहा है।
अमेरिका के नेतृत्व में जी-7 देशों ने पहली बार इतने आक्रामक ढंग चीन काे घेरने की रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार अभियान के तहत पारदर्शी तरीके और आपसी साझेदारी से आधारभूत ढांचे का विकास किया जाएगा। ‘बी-3 डब्ल्यू’ प्राेजेक्ट में करीब 40 लाख करोड़ डॉलर (करीब 2,920 लाख करोड़ रुपए) की परियोजनाएं होंगी।
अमेरिकी संसद से अनुमति लेगा बाइडेन प्रशासन व्हाइट हाउस के अधिकारियाें के अनुसार, अब ‘बी-3 डब्ल्यू’ योजना पर बाइडेन प्रशासन अमेरिकी संसद से अनुमति लेगा। इसके बाद इस पर आगे बढ़ेगा। चूंकि चीन के मसले पर सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी की नीति समान है, इसलिए इसकी मंजूरी में दिक्कत नहीं आएगी। ऐसा माना जा रहा है।
चीन में अल्पसंख्यकों का दमन रोकने का प्रयास जी-7 के सम्मेलन में चीन में व्याप्त बंधुआ मजदूरी प्रथा पर भी कड़े फैसले लेने की सहमति बनी। वहां शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यकों का दमन रोकने के लिए समन्वित प्रयास करने पर भी सभी देश राजी हैं। मालूम हो कि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीनी प्रशासन उइगर मुस्लिमों को बंधुआ बनाकर जबरन मजदूरी कराता है।
जलवायु, स्वास्थ्य समेत 4 क्षेत्राें पर फाेकस हाेगा
‘बी-3 डब्ल्यू’ के जरिए जी-7 और अन्य समान विचारधारा वाले देश मिलकर काम करेंगे। इस प्राेजेक्ट में विकास के लिए निवेश किया जाएगा। जी-7 के देश निजी क्षेत्र की पूंजी का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, डिजिटल प्राैद्याेगिकी और लैंगिक समानता के क्षेत्र में भी करेंगे। इन क्षेत्रों में कार्य का क्या स्वरूप होगा।
चीन से निपटने के मुद्दे पर मतभेद भी आए जी-7 के नेताओं ने चीन से संपर्क करने के तरीके पर गंभीर मतभेद व्यक्त किए। चीन से निपटने के मुद्दे पर तनावपूर्ण सत्र में असहमति सामने आई। यह इतनी संवेदनशील हो गई कि कमरे में इंटरनेट बंद कर दिया गया। सीएनएन के अनुसार, चर्चा के दाैरान यूराेपीय देश अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के खिलाफ दिखे।


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