पर्यावरण दिवस पर विशेष:झारखंड में जंगलों को बचाने की इस अनूठी कहानी से सीखें पर्यावरण प्रबंधन : रांची - AKB NEWS

पर्यावरण दिवस पर विशेष:झारखंड में जंगलों को बचाने की इस अनूठी कहानी से सीखें पर्यावरण प्रबंधन : रांची


 झारखंड में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां पेड़ काटना ताे दूर, एक पत्ता तक नहीं ताेड़ा जा सकता। ये जगहें हैं आदिवासियाें का जाहेरथान या देसाउली। इसे दुनिया की सबसे इकाे-फ्रेंडली जगह कहा जा सकता है। जाहेरथान वह जगह है, जहां आदिवासी एक साथ मिलकर प्रकृति और मरांगबुरु की पूजा-उपासना करते हैं।

यहां का हर पत्ता पवित्र है, संरक्षित है। जाहेरथान में सबसे पवित्र वृक्ष सखुआ होता है। इसके साथ अन्य पेड़-पौधे लगे होते हैं। मुंडारी के प्रोफेसर और रिसर्चर बीरेंद्र सिंह मुंडा सोय ने बताया कि जाहेरथान को मुंडारी में जायर कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार पवित्र स्थलों के पेड़-पौधे एवं पत्थरों से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होती।

शिकारी से किसान बनते ही जाहेरथान बनाया

पर्यावरणविद् आशीष बिरुली कहते हैं कि हजारों साल पहले आदिवासी घुमक्कड़ी जीवन जीते थे। आबादी बढ़ने के कारण वे जगह बदलते रहते थे। दूसरी जगह बसने से पहले लोग जंगल में एक खास जगह जुटते, वहां प्रकृति से जंगली जानवरों और सांपों की रक्षा के लिए प्रार्थना करते। यह जगह ही जाहेरथान या हो भाषा में देसाउली है। जहां गांव बसाया, वहां के जंगल में जाहेरथान बनाया।

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