9 अगस्त 2007 को इंडिजनस पत्र पारित
पश्चिम सिंहभूम के पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकु ने विश्व आदिवासी दिवस पर भारत के आदिवासियों की स्थिति एवं अस्तित्व पर दैनिक भास्कर के साथ अपना विचार साझा किया है। पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि सन् 1985 के आसपास से विश्व में आदिवासियों की स्थिति एवं अस्तित्व पर विचार-विमर्श आरम्भ हुआ और 9 अगस्त 2007 को राष्ट्र संघ-महासभा में आदिवासी (इंडिजनस) घोषणा पत्र पारित किया। इस घोषणा पत्र में 46 अनुच्छेद हैं। जिसमें विश्व के साथ-साथ कुछ विशेष अधिकार की घोषणा की गई।
अनुच्छेद-4 में स्थानीय मामले, स्वशासन आत्मनिर्णय का अधिकार एंव राजनीतिक, संस्कृति, सामाजिक संस्थाओं का संचालन, अनुच्छेद-14 में अपना शिक्षा प्रणाली बनाने का अधिकार, अनुच्छेद-30 में आदिवासी क्षेत्रों में सैनिक गतिविधियों पर पाबंदी एवं अति आवश्यक परिस्थिति में इनकी सहमति पर सैनिक गतिविधि की जा सकती है। इस घोषणा को यूएनडीआरआईपी UNDRIP कहा जाता है। इस घोषणा पत्र पर भारत सरकार ने भी हस्ताक्षर किया है।
देश के 337 जिलाें में 109791 गांवाें में निवास करते हैं 104281034 आदिवासी
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में आदिवासियों की जनसंख्या 104281034 है, जो देश के 337 जिलों के 109791 गांव में निवास करती हैं। आदिवासी बहुल राज्य मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के अलावे देश के 24 जिले 650 प्रखण्ड और 93846 गांव में आदिवासी जनसंख्या बहुमत में है।
इस तरह इनका फैलाव पश्चिम में महाराष्ट्र के थाणे जिला से पूर्व में मणिपुर के तेंगनोपल जिला, उत्तर में हिमालय क्षेत्र से दक्षिण के समुद्र तट तक आदिवासी आबादी का एक पट्टी हैं। द्रबिडियन समूह में सर्वाधिक जनसंख्या 17071049 मील जनजाति की है। गोंड-13256929, मीण- 4345528, उरांव-3682992 और एस्ट्रोलायड परिवार में सर्वाधिक जनसंख्या संथाल- 6570807, मुण्डा- 2203006, हो-1658104 हैं।
from Dainik Bhaskar

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