आर्मी कैंप से डुमरदगा-सुगनू जाने वाले रास्ते को बंद करने का विरोध, सेना व ग्रामीणों में धक्का-मुक्की
डुमरदगा में शनिवार की सुबह मिलिट्री कैंप से होकर डुमरदगा-सुगनू गांव में आने जाने वाले रास्ते को लेकर सेना व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई। सेना के जवानों द्वारा बाउंड्रीवॉल कर रास्ता बंद करने का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। सेना के जवानों ने विवादित रास्ते पर जबरन बाउंड्रीवॉल बनाने का प्रयास किया, इसकी सूचना मिलते ही सैकड़ों की संख्या में महिलाएं-पुरुष कैंप में घुसने का प्रयास करने लगे। लोगों का गुस्सा देखते हुए जवानों ने बाउंड्रीवॉल का काम रोक दिया। इस संबंध में डुमरदगा पंचायत के मुखिया जुगून मुंडा ने बताया कि सेना कैंप से होकर एक रास्ता है,
जिससे सुगनू, लालगंज, खटंगा व टाटीसिल्वे समेत अन्य जगहों पर लोग पिछले कई वर्षों से आना-जाना करते हैं। इस रास्ते को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। फिलहाल इस रास्ते को लेकर मामला कोर्ट में है। अचानक शनिवार की सुबह जवान रास्ते को बंद करने लगे। सेना के जवानों का कहना था कि उनके पास ऐसा कोई कागज नहीं है, जिसमें यह स्पष्ट हो पाए कि इस रास्ते को लेकर मामला कोर्ट में है। विवाद की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्ष के लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
जवानों के सामने गिड़गिड़ाती रहीं महिलाएं
रास्ता बंद करने की सूचना के बाद काफी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। वे सेना के जवानों के सामने रास्ता खुला रखने के लिए गिड़गिड़ाती रहीं। उनका कहना था कि रोजमर्रा के काम के लिए रास्ते का इस्तेमाल होता है। रास्ता बंद हो जाने के बाद उनकी स्कूल तक छूट जाएगी। हालांकि सेना जवान किसी का भी कोई बात सुनने को तैयार नहीं थे।
फरवरी में भी हंगामा हुआ संसद में उठा था मामला
जवानों ने फरवरी में भी इस रास्ते को बंद करने का प्रयास किया था। जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सेना जवानों के सामने ही बाउंड्रीवॉल को तोड़ दिया था। पुलिस की बीचबचाव के बाद पूरा मामला शांत हुआ था। उस समय सांसद संजय सेठ में यह मामला संसद भवन में भी उठाया था और ग्रामीणों के परेशानियों को दूर करने का आग्रह किया था। इसके बाद मामला शांत हो गया था।
from Dainik Bhaskar

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