मुख्यमंत्री ने किया नमन, बोले... आदिवासी संस्कृति, गौरव एवं दर्शन को पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा ने विश्व पटल पर मुखर किया
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं एवं संगठनों ने पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा को उनकी जयंती पर नमन किया। सीएम ने महान शिक्षाविद, कलाकार पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विश्व पटल पर आदिवासी संस्कृति, गौरव और दर्शन को डॉ. मुंडा ने मुखर किया। ‘सेन गी सुसुन, काजी गी दुरंग, डूरी गी दुमंग- आदिवासियों का चलना ही नृत्य, बोलना ही गीत और शरीर ही मांदर है’ को उन्होंने चरितार्थ किया था।
पूरे देश में डॉ. मुंडा को गौरव से याद किया जाता है
जयंती पर कांग्रेस भवन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कहा, पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा को झारखंड ही नहीं देशभर में लोग गौरव से याद करते हैं। आदिवासी अधिकारों के लिए उन्होंने दिल्ली से संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक आवाज उठाई। श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक कुमार दुबे, डॉ. राजेश गुप्ता छोटू, निरंजन पासवान आदि उपस्थित थे।
जे नाची से बांची... कथन में ही बड़ा संदेश : बंधु
मांडर विधायक बंधु तिर्की ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर वृक्षारोपण किया। तिर्की ने कहा कि तमाड़ के दिउड़ी गांव में जन्मे रामदयाल मुंडा एक शिक्षाविद् होने के साथ-साथ झारखंडी कलाकार थे। पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा ने कहा था “जे नाची से बांची’ उनके इस कथन में आज के परिप्रेक्ष्य में झारखंडियों के लिए वृहद संदेश छुपा हुआ है।
डॉ. मुंडा के नाम से बनाएं आदिवासी पुस्तकालय
आदिवासी जन परिषद ने करम टोली के केंद्रीय कार्यालय में पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। परिषद के अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि झारखंड के पैका नृत्य को विश्व स्तरीय पहचान दिलाने का श्रेय डॉ. रामदयाल मुंडा को जाता है। डॉ. मुंडा के नाम से आदिवासी पुस्तकालय स्थापित हो।
from Dainik Bhaskar

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