आदित्यपुर-बंडामुंडा थर्ड लाइन पूरी, उद्योगपति ने चाहा तो फैक्ट्री तक बिछाएंगे पटरी; दूर होगी ट्रांसपोर्टिंग की समस्या : डीआरएम
चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम विजय कुमार साहू ने बुधवार को वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन किया। हाल में गठित बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट से मिल रही उपलब्धियों को बताया। कहा- भारतीय डाक सेवा से रेलवे जुड़ा है, 24 से 36 घंटे में पार्सल पहुंचेगा। वहीं यूनिट गठन होने के बाद रेलवे के अधिकारी फैक्ट्रियों के मालिक से संपर्क में लगे हैं व ट्रांसपोर्टिंग से जुड़ी समस्या का निवारण कर रहे हैं।
उन्हें हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं। ट्रांसपोर्टिंग से जुड़ी कई समस्याएं हमारे पास आई हैं व इसका निवारण होगा। आदित्यपुर से बंडामुंडा तक थर्ड लाइन का काम पूरा हो चुका है व रफ्तार से माल ढुलाई का कार्य चल रहा है। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष चक्रधरपुर मंडल ने माल ढुलाई में अपने टारगेट से ज्यादा इजाफा किया है।
इधर, पार्सल स्पेशल ट्रेन चलने से रेलवे हर छोटे से बड़े शहरों से जुड़ चुका है व काफी कम समय में व्यापारियों का सामान एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन आ रहा है। वैसे उद्योगपति जो रैक बुकिंग कर माल ढुलाई कराएंगे तो उनकी लोडिंग साइट तक पटरी बिछाएगी। इसके लिए उन्हें जमीन देनी होगी व जिस उद्योगपति के पास जमीन नहीं होगी उसको रेलवे जमीन मुहैया कराकर देगी, पर जमीन का भाड़ा उद्योगपति को देना होगा।
बकौल डीआरएम संक्रमण काल में रेलवे माल ढुलाई पर हमारा फोकस है। इससे राजस्व की प्राप्ति होगी व औद्योगिक क्षेत्र को भी ट्रांसपोर्टिंग का लाभ मिलेगा। रेलवे माल ढुलाई-फ्लाई ऐस ढोने के लिए भाड़े में छूट दे रही है, जिससे अधिक से अधिक माल ढुलाई होगी। हाल में चक्रधरपुर मंडल के विभिन्न स्टेशनों में नए लोडिंग प्वाइंट का निर्माण हुआ है। टाटानगर गुड्स शेड में ट्रेनों से गिट्टी की लोडिंग शुरू की है।
टाटानगर का अस्पताल छोटा, डीसी से सेंटर बनाने की मांग
रेलवे के कर्मचारी फ्रंटलाइन में महामारी से जूझ रहे हैं और कार्य कर रहे हैं। चक्रधरपुर रेलवे अस्पताल को कोविड 19 अस्पताल में बदला है परंतु टाटानगर का अस्पताल छोटा होने के कारण यहां कोविड 19 अस्पताल बनाना मुमकिन नहीं है। इसलिए जिले के डीसी से वार्ता हो रही है और करणडीह स्थित एलबीएसएम कॉलेज को कोविड 19 अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है। इसमें जिला प्रशासन की अहम भूमिका रहेगी जबकि रेलवे मेडिकल सुविधा प्रदान करेगी। संक्रमण में वर्तमान में 3 से 4 रेलकर्मी व उनके परिजन की मृत्यु हुई है परंतु बेहतर इलाज के कारण काफी मरीज ठीक हो कर घर भी वापस लौटे हैं।
from Dainik Bhaskar

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