पीएमसीएच में स्वेच्छा से सेवा दे रहीं रितिका ठाकुर ने काम छाेड़ा, अब भुगतान पर विवाद, मांगा खर्च का ब्यौरा
पीएमसीएच के माइक्राेबायाेलाॅजी विभाग में स्वेच्छा से सेवा देनेवाली वायराेलाॅजिस्ट रितिका ठाकुर ने काम छाेड़ दिया है। 3 सितंबर काे इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन काे देने के बाद से वे विभाग में नहीं आईं। काम छाेड़ने की वजह उन्हाेंने पारिवारिक बताई है। रीतिका काेलकाता के इस्सर में रिसर्च असिस्टेंट थीं। लाॅकडाउन के दाैरान अप्रैल से पीएमसीएच में वायराेलाॅजिस्ट के रूप में वाॅलेंटियर के रूप में काम करना शुरू किया।
डीसी उमा शंकर सिंह ने उनके कार्याें की सराहना करते हुए अप्रैल से सितंबर तक मानदेय उन्हें देने का निर्देश संस्थान काे दिया था। स्वतंत्रता दिवस पर रीतिका काे काेराेना वारियर्स के रूप में सम्मानित भी किया गया। हालांकि, उन्हें किए गए भुगतान पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक ने आपत्ति जताते हुए खर्च का ब्याैरा मांगा है।
सीएसआर फंड से किया गया भुगतान
डीसी के निर्देश पर पीएमसीएच के प्राचार्य डाॅ शैलेंद्र कुमार और माइक्राेबायाेलाॅजी विभाग के एचओडी डाॅ बीके सिंह ने रीतिका काे विभाग के अन्य तीन माइक्राेबायाेलाॅजिस्ट के बराबर हर माह 60 हजार रुपए की दर से मानदेय भुगतान की अनुशंसा की। फिर जिला याेजना विभाग से निर्देश के बाद पीएमसीएच के सीएसआर याेजना मद से रीतिका काे प्रति माह 30 हजार रुपए की दर से 15 अप्रैल से अगस्त तक का भुगतान किया गया।
भुगतान नहीं करने की शर्त पर दी गई थी काम लेने की अनुमति | जानकारी के मुताबिक, पीएमसीएच प्रबंधन ने 20 मई काे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक काे पत्र लिखकर रीतिका ठाकुर से काम लेने की अनुमति मांगी थी। 22 मई काे अभियान निदेशक ने अनुमति दे दी, लेकिन शर्त रखी कि इसके एवज में रीतिका का किसी तरह का वित्तीय दावा नहीं हाेगा या उन्हें काेई भुगतान नहीं किया जाएगा।
उठ रहे ये सवाल
- अभियान निदेशक ने जब 22 मई काे रीतिका से काम लेने की अनुमति दी, ताे क्या उनकी अनुमति के पहले से ही उनसे काम लिया जा रहा था?
- जब अभियान निदेशक ने किसी तरह का भुगतान नहीं करने की शर्त पर अनुमति दी थी, ताे फिर भुगतान कैसे किया गया?
- जब प्राचार्य और एचओडी ने प्रति माह 60 हजार रुपए मानदेय की अनुशंसा की थी, ताे फिर प्रति माह 30 हजार रुपए की दर से भुगतान कैसे किया गया?
रीतिका ठाकुर संस्थान के माइक्राेबायाेलाॅजी विभाग में स्वेच्छा से वाॅलेंटियरी सर्विस से जुड़ी थीं। जिले के उपायुक्त के निर्देश पर उन्हें अगस्त तक का मानदेय भुगतान किया गया है।’’
डाॅ शैलेंद्र कुमार, प्राचार्य, पीएमसीएच
from Dainik Bhaskar

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