जमशेदपुर में 140 बस्तियां रेगुलराइज होंगी, इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी बनेगा; निगम बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
रांची में आवास एवं नगर विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में तय हुआ कि एक शहर एक विधान के तर्ज पर औद्योगिक नगर का गठन किया जाएगा। फिलहाल नगर निगम के गठन के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। 2015 में तत्कालीन विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी के आधार पर डीसी सूरज कुमार दो माह के अंदर अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को देंगे। शहर के 86 बस्तियों को वापस टाटा स्टील को सौंपने पर भी विचार-विमर्श किया गया है। शहर में 15 हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनेगा।
इंडस्ट्रियल टाउनशिप की बाधाओं काे दूर करने के लिए बसी 140 अवैध बस्तियों काे रेगुलराइज किया जाएगा। टाटा कंपनी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में रहने वालाें काे टाटा द्वारा नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अवैध बस्तियों में रहने वालाें काे मूलभूत सुविधाएं देने काे लेकर साेमवार काे नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे की अध्यक्षता में बैठक हुई। टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा- पहले अवैध बस्तियों की संख्या 86 थी, अब बढ़कर 140 हाे गई है। चौबे ने कंपनी के प्रतिनिधियों से कहा- इंडस्ट्रियल टाउनशिप कमेटी के अध्यक्ष हाेने के नाते पूर्वी सिंहभूम के डीसी की अध्यक्षता में स्टेक होल्डर्स की बैठक हाेगी। स्टेक होल्डर की बैठक में जमशेदपुर पूर्वी व पश्चिमी के विधायकों को आमंत्रित किया जाएगा। बैठक में कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त डॉ. मनीष रंजन, जमशेदपुर डीसी सूरज कुमार सहित टाटा कंपनी के वीपी (सीएस) चाणक्य चौधरी समेत छह प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इंडस्ट्रियल टाउनशिप में सुविधा देने को टाटा स्टील करेगी खर्च
औद्योगिक टाउनशिप टाटा स्टील समेत सभी कंपनी व उनके क्वार्टर वालों हिस्सों को मिलाकर गठित किया जाएगा। इलाके में नागरिक सुविधा टाटा स्टील प्रबंधन उपलब्ध कराएगी व उसमें सरकारी राशि का उपयोग नहीं होगा। टाटा लीज नवीकरण की मियाद 2025 में खत्म हो रही है। कंपनी लीज का नवीकरण कराने के समय उन इलाकों की जमीन को छोड़ेगी, जहां बस्तियां बसी हैं व भविष्य में कंपनी को उस जमीन पर किसी तरह का प्रोजेक्ट नहीं स्थापित करना है। 2017 में तत्कालीन डीसी अमित कुमार ने औद्योगिक शहर व जमशेदपुर नगर निगम के गठन के संबंध में प्रस्ताव भेजा था। टाटा स्टील के अधिकारी चेयरमैन पर अपना दावा जता रहे थे, पर आज की बैठक में इन लोगों ने डीसी को चेयरमैन के तौर पर स्वीकार करने पर सहमति लगभग प्रदान कर दी। औद्योगिक टाउनशिप के संचालन के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें टाटा स्टील के प्रतिनिधियों के अलावा समाज के एक-दो व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा।
निगम नहीं बनने से केंद्र की योजनाओं से रह जाएंगे वंचित
टाटा स्टील की सहमति के बाद अगर औद्योगिक शहर का गठन होता है तो जमशेदपुर में नगर निगम बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। नगर निगम के गठन नहीं होने से केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर चलाए जाने वाली कई योजनाओं से शहरवासी वंचित ही रहेंगे।
जनता के हित में फैसला लें ताकि परेशानी न हो: शर्मा
सोनारी निवासी जवाहर लाल शर्मा ने निगम-इंडस्ट्रियल टाउन मामले में सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज किया है, जिसकी सुनवाई लंबित हैं। कहा कि 1988 से कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। मामले में सरकार काे मेरी भी राय लेनी चाहिए। जनता के हक में फैसला लें ताकि लोगों को परेशानी न हो।
औद्योगिक नगर लोकतंत्र का विकल्प नहीं हो सकता: बन्ना
स्वास्थ्य मंत्री सह जमशेदपुर पश्चिम के विधायक बन्ना गुप्ता ने कहा कि औद्योगिक नगर लोकतंत्र का विकल्प नहीं हो सकता है। इसलिए जमशेदपुर के औद्योगिक नगर बनाने का विरोध के साथ चरणवद्ध आंदोलन होगा। तीसरे मत के अधिकार के लिए जीवन के अंतिम सांस तक लड़ूंगा।
48 साल से चला आ रहा विवाद, मामला कोर्ट में
नगर निगम और इंडस्ट्रियल टाउन का मामला बिहार के जमाने से...
नगर निगम और इंडस्ट्रियल टाउन का मामला बिहार के जमाने से 1971 से लटका हुआ है। लगभग 48 साल से यह विवाद चला आ रहा है। सुप्रीम काेर्ट में केस चल रहा है। जिसमें तीन पक्ष सामने हैं। जवाहर लाल शर्मा, टाटा स्टील और झारखंड सरकार। सरकार ने टाटा स्टील का पक्ष साेमवार काे जाना। इसके बाद राज्य सरकार मामले में आगे की कार्रवाई के लिए जनप्रतिनिधियाें, स्टेक हाेल्डराें और मामले में पक्षकार जवाहर लाल शर्मा की राय लेगी। चूंकि मामले में तीन पक्ष नगर निगम और औद्याेगिक नगर में आमने-सामने हैं। जिसमें पहला जनता की ओर से जवाहर लाल शर्मा, दूसरा टाटा स्टील और तीसरा राज्य सरकार। मामले में तीनाें पक्षाें की एक साथ बैठक के बाद ही काेई अंतिम निर्णय होगा। सुप्रीम काेर्ट में नगर निगम, औद्याेगिक नगर काे लेकर दिसंबर में जवाहरलाल शर्मा की याचिका पर सुनवाई हाेगी। उन्होंने 2018 में सुप्रीम काेर्ट में केस दर्ज किया था। उस समय झारखंड में रघुवर दास सत्तासीन थी। तत्कालीन सरकार ने मामले में सुप्रीम काेर्ट में एफिडेविट फाइल करने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने झूठ बाेला था कि टाटा स्टील के साथ सरकार का समझाैता हुआ है।

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