पर्यावरण काे नुकसान पहुंचाने वाले पाकुड़ और दुमका के 467 पत्थर कारोबारियों पर एनजीटी ने ठोंका 1138 करोड़ का हर्जाना
वैध-अवैध तरीके से पत्थर खदान का संचालन कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एनजीटी की प्रधान बेंच, नई दिल्ली ने दुमका और पाकुड़ के 467 पत्थर व्यवसायियों पर 1138.44 करोड़ रुपए का हर्जाना ठोंका है।
दुमका के 217 कारोबारियों पर 413.44 करोड़ और पाकुड़ के 250 व्यवसायियों पर 725 करोड़ रुपए हर्जाना भरने का आदेश दिया है। एनजीटी के आदेश पर दुमका जिला प्रशासन ने संबंधित व्यवसायियों को रजिस्ट्री से नोटिस भेज दिया है।
सभी लीजधारकों को नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर जुर्माना की राशि जमा करना है। दुमका में सर्वाधिक 28 करोड़ रुपए का जुर्माना एमएमसी कंपनी पर लगाया गया है। इधर, व्यवसायी जुर्माना की रकम अदा करने के बजाय आदेश के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। बुधवार को व्यवसायियों ने इसे लेकर बैठक की।
2015 में वीरभूम के रामचंद्र ने एनजीटी में किया था मुकदमा
वीरभूम जिला में अवैध खनन कर पर्यावरण काे नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए वहां के रामचंद्र मार्डी ने 2015 में एनजीटी कोलकाता में मुकदमा दायर किया था। सुनवाई के दौरान प. बंंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि यहां नहीं, बल्कि झारखंड के दुमका और पाकुड़ में खनन हो रहा है।
इसके बाद 2018 में बंगाल के अधिकारी दुमका आए थे और जानकारी लेकर एनजीटी को सौंपी थी। इसी रिपोर्ट पर एनजीटी ने मामले की सुनवाई को देश के दूसरे मामलों के साथ जोड़ नई दिल्ली भेज दिया था।
कोर्ट के आदेश का किया जा रहा है पालन
एनजीटी के आदेश पर दुमका जिले के 217 पत्थर कारोबारियों को रजिस्ट्री डाक से नोटिस भेज दिया गया है। हर्जाने की राशि प्राप्त करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। -दिलीप तांती, जिला खनन पदाधिकारी, दुमका
आगे क्या : कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से जारी आदेश के खिलाफ पत्थर कारोबारी कोर्ट जा सकते हैं। हर्जाने की राशि पर अंतिम फैसला कोर्ट में ही होगा।

Leave Comments
एक टिप्पणी भेजें