जिस गाेरखपुरिया धाैड़ा में महिला जमींदाेज हाे गई थी, पुनर्वास के मास्टर प्लान में उसका जिक्र ही नहीं - AKB NEWS

जिस गाेरखपुरिया धाैड़ा में महिला जमींदाेज हाे गई थी, पुनर्वास के मास्टर प्लान में उसका जिक्र ही नहीं

झरिया के विश्वकर्मा प्राेजेक्ट के पास जिस गाेरखपुरिया धाैड़ा में पिछले शुक्रवार काे भू-धंसान की वजह से महिला जमींदाेज हाे गई थी, उस जगह का जिक्र झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जेरेडा) के मास्टर प्लान में है नहीं है। जेआरडीए के एमडी सह डीसी उमा शंकर सिंह के निर्देश पर जेरेडा के अफसराें और झरिया के सीओ की टीम ने हादसे के बाद उस जगह का निरीक्षण किया था। टीम ने उसके बाद जेरेडा के मास्टर प्लान काे खंगाला, ताे उसमें गाेरखपुरिया धाैड़ा कहीं नहीं मिला।

साल 2019 के नए सर्वे के आधार पर बने मास्टर प्लान में भी इस जगह का नाम नहीं है। जेरेडा के प्रभारी पदाधिकारी गुलजार अंजुम से जब इस बारे में पूछा गया, ताे उन्हाेंने कहा कि इस बारे में बीसीसीएल प्रबंधन से भी पूछा गया था। जवाब मिला था कि एरिया संख्या 1/153 वेस्ट एना में ही आसपास का सारा क्षेत्र आता है। इसलिए मास्टर प्लान में गाेरखपुरिया धाैड़ा नामक स्थान का जिक्र नहीं है। गौरतलब है कि इसी जगह पर 18 दिसंबर की सुबह 7:15 बजे गोफ बन गया था, जिसमें कल्याणी देवी (31) नामक महिला समा गई थी।

बीसीसीएल का तर्क- सर्वे के एरिया 1/153 में ही है वह अग्नि प्रभावित जगह

बीसीसीएल से सर्वे का नक्शा, फायर एरिया की सूची मांगी गई

प्रभारी पदाधिकारी का कहना है कि बीसीसीएल प्रबंधन के तर्क से जेरेडा संतुष्ट नहीं है। प्रबंधन ने उस क्षेत्र काे ग्रीन जाेन में दिखाया है, जबकि वह पूरी तरह अग्नि और भू-धंसान प्रभावित है। उन्हाेंने कहा कि साल 2019 के सर्वे में 595 प्वाइंट का जिक्र नक्शा आधारित है। सर्वे के नक्शा तैयार करने की जिम्मेवारी विभिन्न क्षेत्र के जीएम की थी। उसी के आधार पर सर्वे कर रिपाेर्ट तैयार की गई है। बीसीसीएल प्रबंधन काे उन सभी जगहाें के सर्वे का नक्शा और अग्नि प्रभावित क्षेत्राें की सूची उपलब्ध कराने काे कहा गया है, ताकि सर्वे रिपाेर्ट से उसका मिलान किया जा सके।

बीसीसीएल के पास आपात स्थिति के लिए तैयारी नहीं

गुलजार अंजुम का कहना है कि आपदा प्रबंधन की बीसीसीएल के पास काेई तैयारी नहीं है। जेरेडा ने जुलाई 2019 में उसे पत्र लिखकर आपातकाल के लिए सामुदायिक केंद्र या आश्रय गृह बनाने काे कहा था, ताकि भू-धंसान जैसे मामलाें में प्रभावित लाेगाें के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत की जा सके। लेकिन, बीसीसीएल की ओर से जेरेडा काे काेई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई।




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