लैंड म्यूटेशन विधेयक का प्रारूप मंजूर, अपर समाहर्ता रद्द कर सकेंगे दाेहरी जमाबंदी, कैबिनेट की बैठक में कुल 28 प्रस्तावों को दी गई स्वीकृति
कैबिनेट ने मंगलवार काे लैंड म्यूटेशन विधेयक-2020 के प्रारूप काे मंजूरी दे दी। विधानसभा से पारित हाेने के बाद ऑनलाइन म्यूटेशन की प्रक्रिया काे वैधानिक मान्यता मिल जाएगी। म्यूटेशन की प्रक्रिया भी सरल हाेगी। इससे जुड़े राजस्व कर्मचारी से लेकर अंचल अधिकारी और इससे ऊपर के अधिकारियाें की जिम्मेदारी तय हाे जाएगी। अवैध और दाेहरी जमाबंदी की प्रक्रिया भी सरल हाे हाेगी। अपर समाहर्ता अवैध और दाेहरी जमाबंदी रद्द कर सकेंगे। पहले यह अधिकार एलआरडीसी काे था। अब डीसी के यहां अपील और कमिश्नर के यहां रिवीजन पीटिशन दायर किया जा सकेगा। बैठक के बाद कैबिनेट सचिव अजय कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। उन्हाेंने बताया कि कैबिनेट ने कुल 28 प्रस्तावाें काे मंजूरी दी है।
विधेयक में कहा गया है कि झारखंड में म्यूटेशन की प्रक्रिया बिहार टेनेंसी हाेल्डिंग (मेंटेनेंस ऑफ रेकर्ड्स) एक्ट 1973 के तहत की जाती है। इस में ऑनलाइन म्यूटेशन का जिक्र नहीं है। सुभद्रा देवी बनाम झारखंड सरकार के मामले में हाईकाेर्ट में वादी ने यह सवाल उठाया था। इसके बाद सरकार ने प्रारूप तैयार किया।
म्यूटेशन से जुड़े अधिकारियाें और कर्मचारियाें की जिम्मेदारी भी तय
तय समय में नहीं हुआ काम ताे दंडित हाेंगे अफसर
विभाग ने म्यूटेशन से जुड़े काम के लिए समय-सीमा तय कर दी है। अब म्यूटेशन के लिए रैयत सीओ के यहां ऑनलाइन आवेदन करेगा। अगर वह तय समय में इससे जुड़े अधिकारी और कर्मचारी काम पूरा नहीं करते ताे उन्हें कारण बताना हाेगा। कारण संताेषजनक नहीं रहा ताे संबंधित अधिकारियाें काे दंडित भी किया जा सकेगा।
शिड्यूल रेट से 10% नीचे पर भी ठेकेदार ले सकेगा काम
कैबिनेट ने लोक निर्माण संहिता में संशोधन को भी मंजूरी दी। अब राज्य सरकार के किसी भी टेंडर में कोई भी ठेकेदार शिड्यूल रेट से 10 फीसदी नीचे जाकर भी ठेका ले सकेगा। इसके अलावा कई ठेकेदारों द्वारा समान दर दिए जाने पर लाॅटरी के माध्यम से टेंडर दिया जाएगा।
काम की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है- पूर्व आईएएस
पूर्व आईएएस अधिकारी और इंजीनियर रहे अरुण का कहना है कि पीडब्ल्यूडी कोड में 10 फीसदी से नीचे के बाद ही टेंडर रद्द करने का प्रावधान है। टेंडर में 10 फीसदी राशि काॅन्ट्रैक्टर के लाभ के रूप में जुड़ी रहती है। इस प्रावधान के हटने से अगर कोई 40, 50 या 90 फीसदी नीचे रेट पर टेंडर ले लेता है तो उन्हें प्रथम दृष्टया लगता है कि गुणवत्ता प्रभावित हाे सकती है।
from Dainik Bhaskar

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