महाशिवरात्रि आज:श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है जादूगोड़ा का कोकदा स्थित कालेश्वर धाम : जादूगोड़ा
जादूगोड़ा के कोकदा स्थित कालेश्वर शिवमंदिर।
- जादूगोड़ा के बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध मंदिर, महाशिवरात्रि में दूर-दराज से जुटती है भारी भीड़
- मंदिर के बगल में गुर्रा नदी की मनोरम छठा बिखरी
पोटका प्रखंड के आसनबनी स्टेशन से मात्र दो किलोमीटर दूर कोकदा गांव मे स्थित करीब 225 साल पुराने शिव मंदिर स्थित है जो कि कालेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध है। उक्त मंदिर काे जादूगोड़ा के बाबा धाम के नाम से भी जाना जाता है। जमशेदपुर से इस मंदिर की दूरी 17 किलोमीटर है।
इस शिव मंदिर में दर्शन के लिए रेल व सड़क मार्ग से आया जा सकता है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं भीड़ उमड़ती है। मंदिर समिति द्वारा शिवरात्रि के अवसर पर कीर्तन समेत अनेक प्रकार के कार्यक्रमों का आयाेजन किया जाता है।
इस मंदिर के बगल मे कल कल करती गुर्रा नदी बहती है, जिसके चारों ओर का प्राकृतिक दृश्य बहुत ही मनाेरम है। यहां आने पर मन को बहुत शांति मिलती है। यहां से जाने को जी नहीं चाहता है, लोगो का कहना है कि यहां आकार सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है वो अवश्य पूरी होती है।
ग्रामप्रधान और लोगों ने कहा...अजब है इस मंदिर की कहानी
ग्रामीण एवं ग्राम प्रधान गदाधर भक्त के अनुसार, आज से करीब 225वर्ष पहले गांव के ही किसी दास परिवार की गाय ने अचानक से दूध देना बंद कर दिया । दास परिवार ने सोचा की गाय का दूध कहां जा रहा है। लगातार ऐसा होने से परिवार के सदस्यों ने ग्रामीणों के सहयोग से गाय का पीछा किया कि आखिर क्या हो रहा है।
ग्रामीणों ने देखा कि गया नदी के किनारे एक स्थान पर जाकर कुछ देर रुककर वापस आ गयी। ग्रामीणों ने आस-पास की झाड़ियाें की कुल्हाड़ी के सहारे कटाई की। इस क्रम मे सफाई के दौरान जोरदार आवाज़ आई, ग्रामीणों ने देखा की यहां पर एक शिवलिंग है।
कुल्हाड़ी के वार से शिवलिंग में दरार आ गई थी जो आज भी कायम है। गाय यहां खड़ी होकर अपने आप दूध देती है। ग्रामीणों ने इसके बाद इस स्थान मे पूजा पाठ शुरू कर दी। धीरे धीरे मंदिर काे लेकर लोगो की आस्था बढ़ने लगी। ग्रामीणों के सहयोग से धीरे धीरे यहां मंदिर का निर्माण किया गया।
ग्रामीण बोले...इस मंदिर में सबसे पहले पुजारी बाबा रामलखन
ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर में सबसे पहले पुजारी बाबा रामलखन बाबा के द्वारा बहुत ही श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना की जाती थी। इसके बड़ा विश्वनाथ पूरी बाबा जी मंदिर चलाते थे। इसके बाद नित्यानंद बाबा मंदिर की देखभाल करने लगे। पर अचानक से कुछ वर्षों पहले बाबा के कहीं चले जाने के बाद ग्रामीणों द्वारा यहां पूजा पाठ की जाती है।
मंदिर के बगल में ही गुप्त गंगा भी है, जिसमें 12 महीनाें गर्म जल निकलता है। इस जल से स्नान करने से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। मंदिर के बगल में विनय दास बाबा के सहयोग से राधा कृष्ण मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में पूर्व विधायक मेनका सरदार द्वारा सामुदायिक भवन का निर्माण करवाया गया है। यहां आस पास के गांव एवं जमशेदपुर से भक्त पूजा अर्चना करने आते हैं।
मंदिर के लिए कमेटी का किया गया गठन, अलग-अलग पदों पर नियुक्त
मंदिर के विकास के लिए कालेश्वर विकास समिति का गठन किया गया है । मंदिर समिति द्वारा इस वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर कीर्तन समेत अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। जिसकी तैयारी बड़े पैमाने पर की जा रही है। मंदिर के कमेटी के सदस्यों मेें हरेन्द्र नाथ कश्यप, भूपति भूषण महतो, कमललोचन महतो, गुरूपोदो दास, गदाधर महतो, मंजूरानी महतो, सुशील अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, सूरजमल अग्रवाल, जयनारायण गुप्ता, परीमल भकत, दीपक सिंह, तुलसी भकत, लीलाबाती गोप, सेफाली महतो, नूपुर दास आदि के साथ कई ग्रामीण शामिल हैं।


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